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अप्रैल 2008


ब्लॉग्स (11)
कल रात मैं हर रिश्‍ते कोदेर तक अकेली दफ़नाती रहीं इस ख्‍याल से की एक रिश्‍तातो तू बचाने आएगा मेरे ……..।। आगे पढ़ें...

मेरी गुमनाम और अंधेरी जिंदगी में वो प्‍यार ले तो आया परप्‍यार सिर्फ़ खुशीयों को ही अपने दामन में बाँध कर नहीं लातासारे गम वक्‍त कहीं छुपा भी देता तो भी ये कभी जरूर होताआज कमबख्‍त उसके ख्‍याबों ने इन आंखों में आँसू दे ही दिएदिल भी क्‍या करतासिर्फ यही सोचता ... आगे पढ़ें...

आज का दिन ऐसा है जैसे वो हर पल मेरे साथ भी था, और मीलों दूर भीउसका साथ चलना मेरी जरूरत भी था, और खुद की तन्‍हाई मेरी मर्जी भीउसकी हंसी दिल सुकून भी था, और दिल में उठते हज़ारों सवालों का सबब भी उसकी आंखें शांत समुद्र भी थी, और आने वाले किसी तूफान का ईशारा ... आगे पढ़ें...

भावनाओं को चाहिएअभिव्‍यक्ति लेकिनहम चुप रहते है, किबिना कहे वे समझली जाएगी, लेकिनवे रह जाती है अनसुनी क्‍योंकि कहने और सुनने के बीचमौन बस ठिठकाखड़ा रहता है।यहाँ से वहाँ तक बहता नहीं हैबेहतर है कुछ इस तरहजी जाएं अपनी बात कोऐसे शब्‍द दे दिए जाए किजब समय ... आगे पढ़ें...

क्‍या कहुं उसे मैं वो तन्हा छोड़कर जाता है जब मेरा खुद में कुछ रहता नहीं है मेरी शरीर की सारी हलचलें थम जाती है और रह जाती है सिर्फ़ दो आँखें जिन में एक देखती है अमृता (इमी) के इमरोज़ (जीती) का दीदार करती है, तो दूसरी ओशो के परमात्‍मा का अक्‍स ओशो की ही ... आगे पढ़ें...

वो जिंदगी के मोड परआशिकी बन कर मिलता चला गयारात को ख्‍वाब दिन में आरज़ू बन करमुझे दीवाना बनाता चला गयाएक तरफ़ तन्हाई औरएक तरफ तड़प है मेरीवो इस तन्‍हाई को तड़पऔर मेरी तड़प को तन्‍हा बनाता चला गया। आगे पढ़ें...

उस हर एक शब्‍द में जैसे मैं अपने ईश्‍क का दीदार कर रहीं थी, शायद प्‍यार ही है जो दीवानगी की हद को पार करके खुदा के सामने खड़ा होकर भी सिर्फ अपने ईश्‍क का ही दीदार कर रहा है। यूं ही अचानक अपने दोस्‍त से बात करते-करते जैसे मैं अपनी दुनिया में खोती गई और उसे ... आगे पढ़ें...

तेरा आना जैसे….कोई ख्‍वाब आंखों से निकलकरचांद की रोशनी पर सवार होकरअरमानों के दरवाज़े सेफूलों की खुशबू की तरहतेरे रूप मेंमेरी जिंदगी में आ गया। आगे पढ़ें...

डर नहीं है दुनिया का उसकी बाँहों में टूट के बिखर जाना चाहती हूँउस खुदा से लिपट कर खुदा हो जाना चाहती हूँक्‍या नशा है नहीं जानती, बस कहीं दूर बह जाना चाहती हूँ............ये कुछ लफ्ज़ हैं जो कल रात घर में बिखरे सामान की तरह फर्श पर बिखरे मिले, सुबह उठकर ... आगे पढ़ें...

आज फिर साथ न होने की तड़प छोड़ गया वो इस दिल मेंरात भर एक जलती मोमबत्ती की तरह मेरे जिस्‍म को जलाता रहामेरी रूह फिर भी आंसुओ से उस फर्श को रातभर धोती रहींइस चाहत में कि तूं कल फिर आएगा इसी गली से मेरे खुदा। आगे पढ़ें...

मेरे होने पर भीमेरे जाने का डरवो दर्द वो तन्‍हाईतेरी आँखों में दिखती हैमैंने जब भी उस डर कोदेखा है इन आँखों मेंखुद के लिए एक खौफ़महसूस किया है...मैंनेअपना वजूदअपनी खुशियाँअपनी मुस्‍कान कोअर्थी मे बदलते देखा है। आगे पढ़ें...