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21 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (1)
आज फिर साथ न होने की तड़प छोड़ गया वो इस दिल मेंरात भर एक जलती मोमबत्ती की तरह मेरे जिस्‍म को जलाता रहामेरी रूह फिर भी आंसुओ से उस फर्श को रातभर धोती रहींइस चाहत में कि तूं कल फिर आएगा इसी गली से मेरे खुदा। आगे पढ़ें...