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23 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (2)
उस हर एक शब्‍द में जैसे मैं अपने ईश्‍क का दीदार कर रहीं थी, शायद प्‍यार ही है जो दीवानगी की हद को पार करके खुदा के सामने खड़ा होकर भी सिर्फ अपने ईश्‍क का ही दीदार कर रहा है। यूं ही अचानक अपने दोस्‍त से बात करते-करते जैसे मैं अपनी दुनिया में खोती गई और उसे ... आगे पढ़ें...

तेरा आना जैसे….कोई ख्‍वाब आंखों से निकलकरचांद की रोशनी पर सवार होकरअरमानों के दरवाज़े सेफूलों की खुशबू की तरहतेरे रूप मेंमेरी जिंदगी में आ गया। आगे पढ़ें...