Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

25 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (1)
क्‍या कहुं उसे मैं वो तन्हा छोड़कर जाता है जब मेरा खुद में कुछ रहता नहीं है मेरी शरीर की सारी हलचलें थम जाती है और रह जाती है सिर्फ़ दो आँखें जिन में एक देखती है अमृता (इमी) के इमरोज़ (जीती) का दीदार करती है, तो दूसरी ओशो के परमात्‍मा का अक्‍स ओशो की ही ... आगे पढ़ें...