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उसके अतीत का दर्द


मेरी गुमनाम और अंधेरी जिंदगी में वो प्‍यार ले तो आया पर
प्‍यार सिर्फ़ खुशीयों को ही अपने दामन में बाँध कर नहीं लाता
सारे गम वक्‍त कहीं छुपा भी देता तो भी ये कभी जरूर होता
आज कमबख्‍त उसके ख्‍याबों ने इन आंखों में आँसू दे ही दिए

दिल भी क्‍या करता
सिर्फ यही सोचता रहा कि…
काश उसके ख़्वाबों में मेरी ही तस्‍वीर होती
पर उस रात की तरह…
मेरे दामन में आज भी सिर्फ़ कांटे ही पड़े रहें
और मैं उसे अपनी दुनिया समझती रहीं
लाखों ख्‍वाब इन आंखों में सजाएँ रखें

उसने हर बार अपने हाथों से अपने एहसासों को
लिखने के बाद मुझे महसूस करने के लिए दे दिया
कैसे समझाउ उसे…
मैं कोई भगवान नहीं सह जाउँ ये दर्द
वो हर बार अपने एहसासों को शब्‍द देता गया
और मुझे अपने प्‍यार के अंश सुनाता गया

हमारी किस्‍मत में गम के पल थे, पर इतने नहीं
वक्‍त आंसू भरता तो था पर ये जख्‍म नहीं थे
आज वक्‍त न मेरे साथ है न तुम्‍हारे
चलो खुद को अपने-अपने अतीत में ही खो जाने दें।

अस्वीकरण