ravindra vyas द्वारा 28 अप्रैल, 2008 12:17:09 PM IST पर टिप्पणी
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गर्विताजी, हर रिश्तों को कैसे दफनाया जा सकता है? यदि आपने एक फोटो के साथ यूं ही कोई लाइन चिपकाने के लिए यह बात लिखी है तो अलग बात है लेकिन लगता नहीं कि इन खूबसूरत और मार्मिक सी लगती पंक्तियों में आपकी आत्मा का कोई अंधेरा छिपा है। मुझे लगता है आपके साथ यह दिक्कत हो सकती है कि आपने सिर्फ मनुष्यों के साथ ही अपने रिश्तों को जानने-समझने की कोशिश की हो, मुझे लगता है यह कोशिश भी अधूरी ही लगती है। एक बार मनुष्येतर चीजों से भी अपने रिश्ते बनाने की कोशिश करिये। एक तारा, एक चंद्रमा, भरी दोपहर में गाता कोई अनजान पक्षी, आपके ही घर के पिछवाड़े खिलता कोई फूल, एक फल को कुतरता कोई कीड़ा। इनसे बनने वाले हमारे रिश्ते कई बार हमारे अपनों के रिश्तों को नई पहचान, नया अर्थ दे देते हैं और जिन्हें हम दफनाना चाहते हैं उन्हें फिर से एक नई धड़कती हुई जिदंगी दे जाते हैं।
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