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मई 2008


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ब्लॉग्स (22)
आज की दौड़ती भागती जिंदगी में मुस्‍कुराना भी इतना मुश्किल हैकिसी दिन जब यू ही कभी अचानकदिल से.....बारिश की पहली फुहार सीकोई हंसी बरसती हैतो खुद की ही नज़र लग जाती हैऔर लबों पर जाना पहचाना सा कोईगहरा अंधेरा सा सन्‍नाटा छा जाता है...इस सन्‍नाटे में लाखों ... आगे पढ़ें...

मुझेएक ऐसी रोशनी देके शाम ये शरीरउस खुदा के जलते हुए दिये की रोशनीबन जाए!!! आगे पढ़ें...

सितारों से सजी उसकी दुनिया मेंकिसी चाँद का इंतज़ार नहीं होतावो मुस्कुरा दे तो चाँदनी बिखर जाएवो छू लें तो पूनम की रात हो जाए। आगे पढ़ें...

कल ही देखा कुछ बच्‍चे मिट्टी परअपने हाथों का निशान बनाकरउसमें रेखाएँ बना रहें थेफिर कही से हवा का झोंका आयाऔर हाथों पर बनी उन लकीरों कोकहीं-कहीं भर गया तो कहीं सेउसका रूख दूसरी तरफ कर दियाअचानक ख्‍याल आया काश!!हमारे हाथों की रेखाएँ सच मेंमिट्टी की ... आगे पढ़ें...


नए शब्‍द की चाह मेंमैं कल रात पुराने शब्दोंकी गठरी बनाकर उसेपीपल के दरख़्त परटांग आई!!! आगे पढ़ें...

मैं मौन हूंआ,मुझ में तू अपनाशोर भर दें। आगे पढ़ें...

मेरी खामोशी को चीरती हुईअंदर कही गहराई मेंदबे तन्‍हाई के कुंए मेंखुशी का पत्‍थर डालकरमेरे होने का एहसास करा देती हैऔर कहीं दबी मेरी रू‍ह कोएक प्‍यार करने वाला सपनाऔर जीने के लिएअपनी आंखों की रोशनी दे जाती है !! आगे पढ़ें...

मैंने हर बार कहा हम जहां है खुश हैपर शायद वक्‍त इस बात को मानना ही नहीं चाहता थाबार बार यही सवाल हम एक दूसरे से करते रहेदो बच्‍चों की तरह हम भी वक्‍त को सिर्फआधे आधे हिस्‍से में बाँटते रहें और अपनी सफ़ाई पेश करते रहेंजिन बातों को तब मैंने बहुत गहरा कहा ... आगे पढ़ें...

जाने क्‍या था उस समय मेंहर बात उलझती जाती थीजिस डोर को सुलझाना चाहा थावो बीच से कही टूट कर बिखर गईकल रात भी….जिंदगी और मौत के साक्षात्‍कार मेंमौत न जाने कब जिंदगी से जीत गईएक जिस्‍म था जिनका मुद्दामौत न जाने कब उसे जीत कर ले गईएक कतरा था ज़मीन पर आंसू का ... आगे पढ़ें...

अब तो ये भी याद नहीं...उसके चेहरे पर आखिरी बारमुस्‍कुराहट कब देखी थीआज यूँ ही पुराने वक्‍त की,तस्‍वीरों को पलट करतारीख़ों को जमा किया हैशायद कही से कोई दबी सीमुस्‍कान उसके चेहरे पर लौट आए!!! आगे पढ़ें...

आओ, फिर नज़्म कहेंफिर किसी दर्द को सहला के सुजा लें आंखेंफिर किसी दुखती हुई रग से छुआ दें नश्‍तरया किसी भुली हुई राह पे मुड़ कर एक बारनाम ले कर किसी हमनाम को आवाज़ ही दे लें...फिर कोई नज़्म कहें! आगे पढ़ें...

इक अदाकारा हूं मैंजीनी पड़ती है, कई जिंदगियां। एक हयाती में मुझे।मेरा किरदार बदल जाता है। हर रोज़ ही सेट परमेरे हालात बदल जाते हैंमेरा चेहरा भी बदल जाता। अफ़साना-ओ- मंज़र केमुताबिकमेरी आदत बदल जाती है-और फिर दाग नहीं छूटते पहनी हुई पोशाकों केखसता किरदारों ... आगे पढ़ें...

याद है इक दिन...मेरे मेज़ पे बैठे-बैठेसिग्रेट की डिबिया पर तुम नेछोटे से इक पौधे काएक स्‍कैच बनाया था!आ कर देखो-उस पौधे पर फूल आया है!! आगे पढ़ें...


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