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7 मई, 2008


ब्लॉग्स (2)
दो दो शक्‍लें दिखती हैअब मुझे आइने मेंएक जब मैं सामने होती हूं और दूसरी जब नज़रे हटाती हूंतो एक अहसास सा होता हैजैसे मुस्‍कुरा रहा है तूखड़ा कही आइने में आगे पढ़ें...

निकले तो थे दिल कागुबार लेकरचले भी थे मेरी आंखों सेझलक करपहँचे भी इन गालों कोछू करपहुँचे मगर लबों तक तेरीमुस्‍कान बनकर।। आगे पढ़ें...