निकले तो थे दिल कागुबार लेकरचले भी थे मेरी आंखों सेझलक करपहँचे भी इन गालों कोछू करपहुँचे मगर लबों तक तेरीमुस्कान बनकर।।
प्रतिक्रियाएँ