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मुस्‍कुराते आंसू


निकले तो थे दिल का
गुबार लेकर
चले भी थे मेरी आंखों से
झलक कर
पहँचे भी इन गालों को
छू कर
पहुँचे मगर लबों तक तेरी
मुस्‍कान बनकर।।

प्रतिक्रियाएँ

Re: मुस्‍कुराते आंसू
Very Good Poem.
Re: मुस्‍कुराते आंसू
बहुत अच्छी कविता है! आँसू तो होते ही ऐसे है, गम के दिनो को याद करते तो छुप जाते है और खुशी के पल यात करते है तो बह जाते है!
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