दो दो शक्लें दिखती हैअब मुझे आइने मेंएक जब मैं सामने होती हूं और दूसरी जब नज़रे हटाती हूंतो एक अहसास सा होता हैजैसे मुस्कुरा रहा है तूखड़ा कही आइने में