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8 मई, 2008


ब्लॉग्स (1)
रात की खामोशी भी अब रोने लगी हैमुझसे कहने लगी रात में यादों को सहारा ला देंइन आंखो में सजाने के लिए कहीं से ख्‍वाब ला देंदिन में चैन न रात में सुकून है इन आंसूओं कोकहीं से कोई इन्‍हें समटने वाला ला देंसहमी-सहमी सी रहती है मेरी तन्‍हाई भी अबकहीं से इन्‍हें ... आगे पढ़ें...