रात की खामोशी भी अब रोने लगी हैमुझसे कहने लगी रात में यादों को सहारा ला देंइन आंखो में सजाने के लिए कहीं से ख्वाब ला देंदिन में चैन न रात में सुकून है इन आंसूओं कोकहीं से कोई इन्हें समटने वाला ला देंसहमी-सहमी सी रहती है मेरी तन्हाई भी अबकहीं से इन्हें ...
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