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अकेलापन


रात की खामोशी भी अब रोने लगी है
मुझसे कहने लगी रात में यादों को सहारा ला दें
इन आंखो में सजाने के लिए कहीं से ख्‍वाब ला दें
दिन में चैन न रात में सुकून है इन आंसूओं को
कहीं से कोई इन्‍हें समटने वाला ला दें
सहमी-सहमी सी रहती है मेरी तन्‍हाई भी अब
कहीं से इन्‍हें वो पहली सी खुशी ला दें!!!

प्रतिक्रियाएँ

Re: अकेलापन
बहूत सुंदर, आँसुओं का तो काम हि है बहना! गम के दिन याद करते हे तो ये नही बहते, लेकिन खुशी के पल याद करते है तो ये बह जाते है...
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