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9 मई, 2008


ब्लॉग्स (1)
इंतज़ार में तेरे आंखें मेरी पथरा सी गई हैहवाएँ भी आँसू सुखा थककर सो गई हैआग से भी अब पानी मचलकर उठता हैदीवारों से भी अब दिल का खून टपकता हैतेरे न होने का खालीपन से मेरा जीवनबहती नदी में भी सूखे जल सा छलकता है!!! आगे पढ़ें...