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सूखा जल


इंतज़ार में तेरे आंखें मेरी पथरा सी गई है
हवाएँ भी आँसू सुखा थककर सो गई है
आग से भी अब पानी मचलकर उठता है
दीवारों से भी अब दिल का खून टपकता है
तेरे न होने का खालीपन से मेरा जीवन
बहती नदी में भी सूखे जल सा छलकता है!!!

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