आओ, फिर नज़्म कहेंफिर किसी दर्द को सहला के सुजा लें आंखेंफिर किसी दुखती हुई रग से छुआ दें नश्तरया किसी भुली हुई राह पे मुड़ कर एक बारनाम ले कर किसी हमनाम को आवाज़ ही दे लें...फिर कोई नज़्म कहें!