मैंने हर बार कहा हम जहां है खुश हैपर शायद वक्त इस बात को मानना ही नहीं चाहता थाबार बार यही सवाल हम एक दूसरे से करते रहेदो बच्चों की तरह हम भी वक्त को सिर्फआधे आधे हिस्से में बाँटते रहें और अपनी सफ़ाई पेश करते रहेंजिन बातों को तब मैंने बहुत गहरा कहा ...
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