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23 मई, 2008


ब्लॉग्स (2)
मेरी खामोशी को चीरती हुईअंदर कही गहराई मेंदबे तन्‍हाई के कुंए मेंखुशी का पत्‍थर डालकरमेरे होने का एहसास करा देती हैऔर कहीं दबी मेरी रू‍ह कोएक प्‍यार करने वाला सपनाऔर जीने के लिएअपनी आंखों की रोशनी दे जाती है !! आगे पढ़ें...

मैंने हर बार कहा हम जहां है खुश हैपर शायद वक्‍त इस बात को मानना ही नहीं चाहता थाबार बार यही सवाल हम एक दूसरे से करते रहेदो बच्‍चों की तरह हम भी वक्‍त को सिर्फआधे आधे हिस्‍से में बाँटते रहें और अपनी सफ़ाई पेश करते रहेंजिन बातों को तब मैंने बहुत गहरा कहा ... आगे पढ़ें...