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काश!!!


कल ही देखा कुछ बच्‍चे मिट्टी पर
अपने हाथों का निशान बनाकर
उसमें रेखाएँ बना रहें थे
फिर कही से हवा का झोंका आया
और हाथों पर बनी उन लकीरों को
कहीं-कहीं भर गया तो कहीं से
उसका रूख दूसरी तरफ कर दिया
अचानक ख्‍याल आया काश!!
हमारे हाथों की रेखाएँ सच में
मिट्टी की होती
आँसूओं से भीगती,
सौंधी सी खुशबू देती,
या तो तूफान में बह जाती
या हवा के रूख से बदल जाती
कभी ऐसा होता तो मैं
रोज़ अपनी तकदीर को
तेरे दर तक खींच लाती और
तुझे अपनी रेखाओं से कैद कर लेती!!!

प्रतिक्रियाएँ

Re: काश!!!
कभी-कभी खूबसूरत ख्याल खूबसूरत शरीर भी धारण कर लेता है ऐसा इमरोज़ ने कहा था- उसने शायद खूबसूरत दुआ नहीं देखी होगी...
Re: काश!!!
बहूत खूबसूरत है। संवेदनाओ की सारी सीमाओं को तोड़ती अपनी रेखाओं को संवारने की कोशिश करती है। काश मेरे हाथ की रेखाएँ भी मिटटी की होती तो अपने मुताबिक उन्‍हे गढ़ता और उकेरता... पर काश ऐसा होता कि रेखाएँ मिटटी की होती न कि जिंदगी मि‍टटी में होती। मोक्ष ...
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