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मेरे इश्‍क


मुझे
एक ऐसी रोशनी दे
के शाम ये शरीर
उस खुदा के जलते
हुए दिये की रोशनी
बन जाए!!!

प्रतिक्रियाएँ

Re: मेरे इश्‍क
ये ले सम्‍भाल के रख अपनी मूठ्ठी मे, एक पुड़ि‍या तुझे देता हूँ रोशनी की, शाम होते ही मुठ्ठी खोल कर आमीन कहना सुबह तक तु रोशनी ही रोशनी होगी ... मोक्ष
Re: मेरे इश्‍क
आमीन
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