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31 मई, 2008


ब्लॉग्स (1)
आज की दौड़ती भागती जिंदगी में मुस्‍कुराना भी इतना मुश्किल हैकिसी दिन जब यू ही कभी अचानकदिल से.....बारिश की पहली फुहार सीकोई हंसी बरसती हैतो खुद की ही नज़र लग जाती हैऔर लबों पर जाना पहचाना सा कोईगहरा अंधेरा सा सन्‍नाटा छा जाता है...इस सन्‍नाटे में लाखों ... आगे पढ़ें...