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कभी-कभी


आज की दौड़ती भागती जिंदगी में
मुस्‍कुराना भी इतना मुश्किल है
किसी दिन जब यू ही कभी अचानक
दिल से.....
बारिश की पहली फुहार सी
कोई हंसी बरसती है
तो खुद की ही नज़र लग जाती है
और लबों पर जाना पहचाना सा कोई
गहरा अंधेरा सा सन्‍नाटा छा जाता है...
इस सन्‍नाटे में लाखों परेशानीयों और
आने वाले कल को संवारने के
हज़ारों सवाल एक साथ नज़र आने लगते है
और कही कोने में छुपा सा प्‍यार का एहसास
इन सब में कहीं गुम सा हो जाता है।

अस्वीकरण