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ब्लॉग्स (47)


>इस जहान से, जिसकी मैं कभी हो न सकीजहाँ का ख्‍वाब कभी मैं देख न सकीजिसके असूलों पर कभी खरी उतर न सकीजिसके दर्द मे अपने आँसू बहा न सकीजिसकी ना पर,मैं टूट कर धरती में समा न सकीहाँ, मैं खुश हूँ अपने जहान में जहाँ मेरा आसमां तो है। आगे पढ़ें...

वो परी अपने साथ मुझेपानी की गहराइयों में कहींदूर तक ले जा रही थीउसके हाथ को थामकर मैंनीले जल में नीचे उतरती गईतभी कुछ गरम सा एहसास हुआमैंने आंखे खोली तो दूर समंदर मेंआग उबल रही थी कहींउस परी ने पास ले जाकर बतायाये वही आग है..जिसे तुमने अपने भीतर छुपा रखा ... आगे पढ़ें...

वो भी बैचेनी में लिपटी अजीब सी सुबह का आगाज़ थासूरज भी खुद को काले कंबल में लपेटा चुपचाप खड़ा थादूर कहीं चांद भी आंसमा से उस रोशनी को ताक रहा थागगन के तारे भी उस रोशनी के आगे फीके दिख रहे थेधरती पर कहीं दूर बहती हुई नदी ने अपने भीतरएक शमा को पानी की लौ से ... आगे पढ़ें...

सबकुछ मेरे आस पास ही थाऔर वो सब थे मेरे पास एकदम शांतअचानक महसूस हुआकोई मेरे अंदर कहीं से झांक रहा हैया दिख रहा था वो मुझे हर कहींआसमान मे, धरती पर, मेरे हाथों मेंमेरी पलकों पर, मुस्‍कुराते होंठो परबहते ऑसुओं में, दोस्‍तों में, अपनों मेंहर कही....फिर भी ... आगे पढ़ें...

आज की दौड़ती भागती जिंदगी में मुस्‍कुराना भी इतना मुश्किल हैकिसी दिन जब यू ही कभी अचानकदिल से.....बारिश की पहली फुहार सीकोई हंसी बरसती हैतो खुद की ही नज़र लग जाती हैऔर लबों पर जाना पहचाना सा कोईगहरा अंधेरा सा सन्‍नाटा छा जाता है...इस सन्‍नाटे में लाखों ... आगे पढ़ें...

मुझेएक ऐसी रोशनी देके शाम ये शरीरउस खुदा के जलते हुए दिये की रोशनीबन जाए!!! आगे पढ़ें...

सितारों से सजी उसकी दुनिया मेंकिसी चाँद का इंतज़ार नहीं होतावो मुस्कुरा दे तो चाँदनी बिखर जाएवो छू लें तो पूनम की रात हो जाए। आगे पढ़ें...

कल ही देखा कुछ बच्‍चे मिट्टी परअपने हाथों का निशान बनाकरउसमें रेखाएँ बना रहें थेफिर कही से हवा का झोंका आयाऔर हाथों पर बनी उन लकीरों कोकहीं-कहीं भर गया तो कहीं सेउसका रूख दूसरी तरफ कर दियाअचानक ख्‍याल आया काश!!हमारे हाथों की रेखाएँ सच मेंमिट्टी की ... आगे पढ़ें...


नए शब्‍द की चाह मेंमैं कल रात पुराने शब्दोंकी गठरी बनाकर उसेपीपल के दरख़्त परटांग आई!!! आगे पढ़ें...

मैं मौन हूंआ,मुझ में तू अपनाशोर भर दें। आगे पढ़ें...

मेरी खामोशी को चीरती हुईअंदर कही गहराई मेंदबे तन्‍हाई के कुंए मेंखुशी का पत्‍थर डालकरमेरे होने का एहसास करा देती हैऔर कहीं दबी मेरी रू‍ह कोएक प्‍यार करने वाला सपनाऔर जीने के लिएअपनी आंखों की रोशनी दे जाती है !! आगे पढ़ें...

मैंने हर बार कहा हम जहां है खुश हैपर शायद वक्‍त इस बात को मानना ही नहीं चाहता थाबार बार यही सवाल हम एक दूसरे से करते रहेदो बच्‍चों की तरह हम भी वक्‍त को सिर्फआधे आधे हिस्‍से में बाँटते रहें और अपनी सफ़ाई पेश करते रहेंजिन बातों को तब मैंने बहुत गहरा कहा ... आगे पढ़ें...

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