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ब्लॉग्स (47)
जाने क्‍या था उस समय मेंहर बात उलझती जाती थीजिस डोर को सुलझाना चाहा थावो बीच से कही टूट कर बिखर गईकल रात भी….जिंदगी और मौत के साक्षात्‍कार मेंमौत न जाने कब जिंदगी से जीत गईएक जिस्‍म था जिनका मुद्दामौत न जाने कब उसे जीत कर ले गईएक कतरा था ज़मीन पर आंसू का ... आगे पढ़ें...

अब तो ये भी याद नहीं...उसके चेहरे पर आखिरी बारमुस्‍कुराहट कब देखी थीआज यूँ ही पुराने वक्‍त की,तस्‍वीरों को पलट करतारीख़ों को जमा किया हैशायद कही से कोई दबी सीमुस्‍कान उसके चेहरे पर लौट आए!!! आगे पढ़ें...

आओ, फिर नज़्म कहेंफिर किसी दर्द को सहला के सुजा लें आंखेंफिर किसी दुखती हुई रग से छुआ दें नश्‍तरया किसी भुली हुई राह पे मुड़ कर एक बारनाम ले कर किसी हमनाम को आवाज़ ही दे लें...फिर कोई नज़्म कहें! आगे पढ़ें...

इक अदाकारा हूं मैंजीनी पड़ती है, कई जिंदगियां। एक हयाती में मुझे।मेरा किरदार बदल जाता है। हर रोज़ ही सेट परमेरे हालात बदल जाते हैंमेरा चेहरा भी बदल जाता। अफ़साना-ओ- मंज़र केमुताबिकमेरी आदत बदल जाती है-और फिर दाग नहीं छूटते पहनी हुई पोशाकों केखसता किरदारों ... आगे पढ़ें...

याद है इक दिन...मेरे मेज़ पे बैठे-बैठेसिग्रेट की डिबिया पर तुम नेछोटे से इक पौधे काएक स्‍कैच बनाया था!आ कर देखो-उस पौधे पर फूल आया है!! आगे पढ़ें...




इंतज़ार में तेरे आंखें मेरी पथरा सी गई हैहवाएँ भी आँसू सुखा थककर सो गई हैआग से भी अब पानी मचलकर उठता हैदीवारों से भी अब दिल का खून टपकता हैतेरे न होने का खालीपन से मेरा जीवनबहती नदी में भी सूखे जल सा छलकता है!!! आगे पढ़ें...

रात की खामोशी भी अब रोने लगी हैमुझसे कहने लगी रात में यादों को सहारा ला देंइन आंखो में सजाने के लिए कहीं से ख्‍वाब ला देंदिन में चैन न रात में सुकून है इन आंसूओं कोकहीं से कोई इन्‍हें समटने वाला ला देंसहमी-सहमी सी रहती है मेरी तन्‍हाई भी अबकहीं से इन्‍हें ... आगे पढ़ें...

दो दो शक्‍लें दिखती हैअब मुझे आइने मेंएक जब मैं सामने होती हूं और दूसरी जब नज़रे हटाती हूंतो एक अहसास सा होता हैजैसे मुस्‍कुरा रहा है तूखड़ा कही आइने में आगे पढ़ें...

निकले तो थे दिल कागुबार लेकरचले भी थे मेरी आंखों सेझलक करपहँचे भी इन गालों कोछू करपहुँचे मगर लबों तक तेरीमुस्‍कान बनकर।। आगे पढ़ें...

कहने को तो कहा जाता है कि बच्‍चों पर अत्‍याचार करना अपराध है, और देखा भी जाएं तो प्रत्‍यक्ष रूप से तो कोई भी बच्‍चों से कार्य भी नहीं करवाता या करवाएगा। बाल श्रम पर रोक जो लगाई गई है और एक दो हफ़्ते में तो पुलिस और मीडिया द्वारा इस पर आवाज़ भी उठाई जाती ... आगे पढ़ें...

कल रात मैं हर रिश्‍ते कोदेर तक अकेली दफ़नाती रहीं इस ख्‍याल से की एक रिश्‍तातो तू बचाने आएगा मेरे ……..।। आगे पढ़ें...

मेरी गुमनाम और अंधेरी जिंदगी में वो प्‍यार ले तो आया परप्‍यार सिर्फ़ खुशीयों को ही अपने दामन में बाँध कर नहीं लातासारे गम वक्‍त कहीं छुपा भी देता तो भी ये कभी जरूर होताआज कमबख्‍त उसके ख्‍याबों ने इन आंखों में आँसू दे ही दिएदिल भी क्‍या करतासिर्फ यही सोचता ... आगे पढ़ें...

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