आज का दिन ऐसा है जैसे वो हर पल मेरे साथ भी था, और मीलों दूर भीउसका साथ चलना मेरी जरूरत भी था, और खुद की तन्हाई मेरी मर्जी भीउसकी हंसी दिल सुकून भी था, और दिल में उठते हज़ारों सवालों का सबब भी उसकी आंखें शांत समुद्र भी थी, और आने वाले किसी तूफान का ईशारा ... आगे पढ़ें...
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भावनाओं को चाहिएअभिव्यक्ति लेकिनहम चुप रहते है, किबिना कहे वे समझली जाएगी, लेकिनवे रह जाती है अनसुनी क्योंकि कहने और सुनने के बीचमौन बस ठिठकाखड़ा रहता है।यहाँ से वहाँ तक बहता नहीं हैबेहतर है कुछ इस तरहजी जाएं अपनी बात कोऐसे शब्द दे दिए जाए किजब समय ... आगे पढ़ें...
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क्या कहुं उसे मैं वो तन्हा छोड़कर जाता है जब मेरा खुद में कुछ रहता नहीं है मेरी शरीर की सारी हलचलें थम जाती है और रह जाती है सिर्फ़ दो आँखें जिन में एक देखती है अमृता (इमी) के इमरोज़ (जीती) का दीदार करती है, तो दूसरी ओशो के परमात्मा का अक्स ओशो की ही ... आगे पढ़ें...
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वो जिंदगी के मोड परआशिकी बन कर मिलता चला गयारात को ख्वाब दिन में आरज़ू बन करमुझे दीवाना बनाता चला गयाएक तरफ़ तन्हाई औरएक तरफ तड़प है मेरीवो इस तन्हाई को तड़पऔर मेरी तड़प को तन्हा बनाता चला गया। आगे पढ़ें...
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उस हर एक शब्द में जैसे मैं अपने ईश्क का दीदार कर रहीं थी, शायद प्यार ही है जो दीवानगी की हद को पार करके खुदा के सामने खड़ा होकर भी सिर्फ अपने ईश्क का ही दीदार कर रहा है। यूं ही अचानक अपने दोस्त से बात करते-करते जैसे मैं अपनी दुनिया में खोती गई और उसे ... आगे पढ़ें...
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तेरा आना जैसे….कोई ख्वाब आंखों से निकलकरचांद की रोशनी पर सवार होकरअरमानों के दरवाज़े सेफूलों की खुशबू की तरहतेरे रूप मेंमेरी जिंदगी में आ गया। आगे पढ़ें...
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डर नहीं है दुनिया का उसकी बाँहों में टूट के बिखर जाना चाहती हूँउस खुदा से लिपट कर खुदा हो जाना चाहती हूँक्या नशा है नहीं जानती, बस कहीं दूर बह जाना चाहती हूँ............ये कुछ लफ्ज़ हैं जो कल रात घर में बिखरे सामान की तरह फर्श पर बिखरे मिले, सुबह उठकर ... आगे पढ़ें...
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आज फिर साथ न होने की तड़प छोड़ गया वो इस दिल मेंरात भर एक जलती मोमबत्ती की तरह मेरे जिस्म को जलाता रहामेरी रूह फिर भी आंसुओ से उस फर्श को रातभर धोती रहींइस चाहत में कि तूं कल फिर आएगा इसी गली से मेरे खुदा। आगे पढ़ें...
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मेरे होने पर भीमेरे जाने का डरवो दर्द वो तन्हाईतेरी आँखों में दिखती हैमैंने जब भी उस डर कोदेखा है इन आँखों मेंखुद के लिए एक खौफ़महसूस किया है...मैंनेअपना वजूदअपनी खुशियाँअपनी मुस्कान कोअर्थी मे बदलते देखा है। आगे पढ़ें...
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उसके होने पर उसकी याद में बहते आंसू उसके लफ़्ज़ों का मुझमें समा जानाउसके जाने पर उसके प्यार का एहसासउसकी मुझे पा लेने की वो बेचैनीमेरी आत्मा की वो तड़पबिछड़कर फिर मिलने की कशिशमेरे सारे आंसू, मेरी मुस्कुराहटमेरा चलना, मेरा रुकना मेरी बातें, वो मेरी ... आगे पढ़ें...
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मैं जब आपके चेहरे पर आई एक छोटी-सी शिकन भी पहचान जाती हूं। आपकी सतही हँसी से लेकर गहरी मुस्कुराहट के बीच आए हर भाव को, आपकी आँखों के आँसुओं से लेकर आपकी उदासी के बीच की हर उलझन को आपके चेहरे पर पढ़ लेती हूं......... मेरे छोटे-छोटे सवालों ने आपके जीवन में ... आगे पढ़ें...
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 जिस शब्दकोश से मैं शब्द लेती थी,आज वो शब्दकोश कहीं गुम हो गया है!!! आगे पढ़ें...
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>हर दुख से बेगाना तो हैहर खुशी से अनजाना भी हैन गम है जिंदगी में बहुतन ही खुशी के छोटे पल भी हैन कोई दोस्त है हमारा यहांऔर न ही यहां कोई अजनबी हैछांव में चलते है तो धूप चुभती हैऔर धूप में प्यार की छांव भी हैठंडी हवाओं की चुभन है तोगर्मी में तेरा मीठा ... आगे पढ़ें...
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कितनी अनकही बातें थी हमारी या फिर सिर्फ़ मैं ही कहती रही…..हमारे रिश्ते की शुरूआत से लेकर अंत तक हमारे प्यार की कहानी में सिर्फ मेरे ही संवाद रहे। जैसे मैं बस खुद से ही बातें करती रही, खुद से प्यार करती रही जैसे अक्सर बच्चे करते है गुड्डे गुड़िय़ों के ... आगे पढ़ें...
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ओशो को जब भी पढ़ा अंदर एक अजीब सी बेचैनी रहीं है...हर बार एक नया सवाल और उसे पढ़ने, जवाब पा लेने के बाद फिर एक नए सवाल का जन्म?खुद से हज़ारों सवाल करने और परेशान होने के बाद जब मैंने कल ओशो पढ़ा तो सिर्फ एक ही जवाब मिला कि जो बेचैनी, अकेलेपन में सुकुन का ... आगे पढ़ें...
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