उसने हमेशा मेरे द्वारा तकलीफ देने पर यही कहा कि "आग में जलकर ही सोना कुंदन बनता है" मैं इसका मतलब नहीं समझ पाई। पर आज जैसे ही मैंने ओशो को अपने हाथों में लिया एक अजीब सा अहसास था, ऐसा लगा कोई चीज़ जो मुझतक पहुंचने को बेकरार थी आज मुझे मिल गई उसे खोलने पर ...
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