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चैनल: प्‍यार


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ब्लॉग्स (18)
सबकुछ मेरे आस पास ही थाऔर वो सब थे मेरे पास एकदम शांतअचानक महसूस हुआकोई मेरे अंदर कहीं से झांक रहा हैया दिख रहा था वो मुझे हर कहींआसमान मे, धरती पर, मेरे हाथों मेंमेरी पलकों पर, मुस्‍कुराते होंठो परबहते ऑसुओं में, दोस्‍तों में, अपनों मेंहर कही....फिर भी ... आगे पढ़ें...

मुझेएक ऐसी रोशनी देके शाम ये शरीरउस खुदा के जलते हुए दिये की रोशनीबन जाए!!! आगे पढ़ें...

सितारों से सजी उसकी दुनिया मेंकिसी चाँद का इंतज़ार नहीं होतावो मुस्कुरा दे तो चाँदनी बिखर जाएवो छू लें तो पूनम की रात हो जाए। आगे पढ़ें...

कल ही देखा कुछ बच्‍चे मिट्टी परअपने हाथों का निशान बनाकरउसमें रेखाएँ बना रहें थेफिर कही से हवा का झोंका आयाऔर हाथों पर बनी उन लकीरों कोकहीं-कहीं भर गया तो कहीं सेउसका रूख दूसरी तरफ कर दियाअचानक ख्‍याल आया काश!!हमारे हाथों की रेखाएँ सच मेंमिट्टी की ... आगे पढ़ें...

मैं मौन हूंआ,मुझ में तू अपनाशोर भर दें। आगे पढ़ें...

मेरी खामोशी को चीरती हुईअंदर कही गहराई मेंदबे तन्‍हाई के कुंए मेंखुशी का पत्‍थर डालकरमेरे होने का एहसास करा देती हैऔर कहीं दबी मेरी रू‍ह कोएक प्‍यार करने वाला सपनाऔर जीने के लिएअपनी आंखों की रोशनी दे जाती है !! आगे पढ़ें...

दो दो शक्‍लें दिखती हैअब मुझे आइने मेंएक जब मैं सामने होती हूं और दूसरी जब नज़रे हटाती हूंतो एक अहसास सा होता हैजैसे मुस्‍कुरा रहा है तूखड़ा कही आइने में आगे पढ़ें...

निकले तो थे दिल कागुबार लेकरचले भी थे मेरी आंखों सेझलक करपहँचे भी इन गालों कोछू करपहुँचे मगर लबों तक तेरीमुस्‍कान बनकर।। आगे पढ़ें...

वो जिंदगी के मोड परआशिकी बन कर मिलता चला गयारात को ख्‍वाब दिन में आरज़ू बन करमुझे दीवाना बनाता चला गयाएक तरफ़ तन्हाई औरएक तरफ तड़प है मेरीवो इस तन्‍हाई को तड़पऔर मेरी तड़प को तन्‍हा बनाता चला गया। आगे पढ़ें...

उस हर एक शब्‍द में जैसे मैं अपने ईश्‍क का दीदार कर रहीं थी, शायद प्‍यार ही है जो दीवानगी की हद को पार करके खुदा के सामने खड़ा होकर भी सिर्फ अपने ईश्‍क का ही दीदार कर रहा है। यूं ही अचानक अपने दोस्‍त से बात करते-करते जैसे मैं अपनी दुनिया में खोती गई और उसे ... आगे पढ़ें...

तेरा आना जैसे….कोई ख्‍वाब आंखों से निकलकरचांद की रोशनी पर सवार होकरअरमानों के दरवाज़े सेफूलों की खुशबू की तरहतेरे रूप मेंमेरी जिंदगी में आ गया। आगे पढ़ें...

डर नहीं है दुनिया का उसकी बाँहों में टूट के बिखर जाना चाहती हूँउस खुदा से लिपट कर खुदा हो जाना चाहती हूँक्‍या नशा है नहीं जानती, बस कहीं दूर बह जाना चाहती हूँ............ये कुछ लफ्ज़ हैं जो कल रात घर में बिखरे सामान की तरह फर्श पर बिखरे मिले, सुबह उठकर ... आगे पढ़ें...

आज फिर साथ न होने की तड़प छोड़ गया वो इस दिल मेंरात भर एक जलती मोमबत्ती की तरह मेरे जिस्‍म को जलाता रहामेरी रूह फिर भी आंसुओ से उस फर्श को रातभर धोती रहींइस चाहत में कि तूं कल फिर आएगा इसी गली से मेरे खुदा। आगे पढ़ें...

मेरे होने पर भीमेरे जाने का डरवो दर्द वो तन्‍हाईतेरी आँखों में दिखती हैमैंने जब भी उस डर कोदेखा है इन आँखों मेंखुद के लिए एक खौफ़महसूस किया है...मैंनेअपना वजूदअपनी खुशियाँअपनी मुस्‍कान कोअर्थी मे बदलते देखा है। आगे पढ़ें...

उसके होने पर उसकी याद में बहते आंसू उसके लफ़्ज़ों का मुझमें समा जानाउसके जाने पर उसके प्‍यार का एहसासउसकी मुझे पा लेने की वो बेचैनीमेरी आत्‍मा की वो तड़पबिछड़कर फिर मिलने की कशिशमेरे सारे आंसू, मेरी मुस्‍कुराहटमेरा चलना, मेरा रुकना मेरी बातें, वो मेरी ... आगे पढ़ें...

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