ओशो को जब भी पढ़ा अंदर एक अजीब सी बेचैनी रहीं है...हर बार एक नया सवाल और उसे पढ़ने, जवाब पा लेने के बाद फिर एक नए सवाल का जन्म?खुद से हज़ारों सवाल करने और परेशान होने के बाद जब मैंने कल ओशो पढ़ा तो सिर्फ एक ही जवाब मिला कि जो बेचैनी, अकेलेपन में सुकुन का ...
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