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चैनल: गुलज़ार के पन्‍ने


ब्लॉग्स (3)
आओ, फिर नज़्म कहेंफिर किसी दर्द को सहला के सुजा लें आंखेंफिर किसी दुखती हुई रग से छुआ दें नश्‍तरया किसी भुली हुई राह पे मुड़ कर एक बारनाम ले कर किसी हमनाम को आवाज़ ही दे लें...फिर कोई नज़्म कहें! आगे पढ़ें...

इक अदाकारा हूं मैंजीनी पड़ती है, कई जिंदगियां। एक हयाती में मुझे।मेरा किरदार बदल जाता है। हर रोज़ ही सेट परमेरे हालात बदल जाते हैंमेरा चेहरा भी बदल जाता। अफ़साना-ओ- मंज़र केमुताबिकमेरी आदत बदल जाती है-और फिर दाग नहीं छूटते पहनी हुई पोशाकों केखसता किरदारों ... आगे पढ़ें...

याद है इक दिन...मेरे मेज़ पे बैठे-बैठेसिग्रेट की डिबिया पर तुम नेछोटे से इक पौधे काएक स्‍कैच बनाया था!आ कर देखो-उस पौधे पर फूल आया है!! आगे पढ़ें...