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चैनल: जिंदगी


ब्लॉग्स (10)


>इस जहान से, जिसकी मैं कभी हो न सकीजहाँ का ख्‍वाब कभी मैं देख न सकीजिसके असूलों पर कभी खरी उतर न सकीजिसके दर्द मे अपने आँसू बहा न सकीजिसकी ना पर,मैं टूट कर धरती में समा न सकीहाँ, मैं खुश हूँ अपने जहान में जहाँ मेरा आसमां तो है। आगे पढ़ें...

जाने क्‍या था उस समय मेंहर बात उलझती जाती थीजिस डोर को सुलझाना चाहा थावो बीच से कही टूट कर बिखर गईकल रात भी….जिंदगी और मौत के साक्षात्‍कार मेंमौत न जाने कब जिंदगी से जीत गईएक जिस्‍म था जिनका मुद्दामौत न जाने कब उसे जीत कर ले गईएक कतरा था ज़मीन पर आंसू का ... आगे पढ़ें...

अब तो ये भी याद नहीं...उसके चेहरे पर आखिरी बारमुस्‍कुराहट कब देखी थीआज यूँ ही पुराने वक्‍त की,तस्‍वीरों को पलट करतारीख़ों को जमा किया हैशायद कही से कोई दबी सीमुस्‍कान उसके चेहरे पर लौट आए!!! आगे पढ़ें...

कल रात मैं हर रिश्‍ते कोदेर तक अकेली दफ़नाती रहीं इस ख्‍याल से की एक रिश्‍तातो तू बचाने आएगा मेरे ……..।। आगे पढ़ें...

भावनाओं को चाहिएअभिव्‍यक्ति लेकिनहम चुप रहते है, किबिना कहे वे समझली जाएगी, लेकिनवे रह जाती है अनसुनी क्‍योंकि कहने और सुनने के बीचमौन बस ठिठकाखड़ा रहता है।यहाँ से वहाँ तक बहता नहीं हैबेहतर है कुछ इस तरहजी जाएं अपनी बात कोऐसे शब्‍द दे दिए जाए किजब समय ... आगे पढ़ें...

क्‍या कहुं उसे मैं वो तन्हा छोड़कर जाता है जब मेरा खुद में कुछ रहता नहीं है मेरी शरीर की सारी हलचलें थम जाती है और रह जाती है सिर्फ़ दो आँखें जिन में एक देखती है अमृता (इमी) के इमरोज़ (जीती) का दीदार करती है, तो दूसरी ओशो के परमात्‍मा का अक्‍स ओशो की ही ... आगे पढ़ें...

जिस शब्‍दकोश से मैं शब्‍द लेती थी,आज वो शब्‍दकोश कहीं गुम हो गया है!!! आगे पढ़ें...

कितनी अनकही बातें थी हमारी या फिर सिर्फ़ मैं ही कहती रही…..हमारे रिश्‍ते की शुरूआत से लेकर अंत तक हमारे प्‍यार की कहानी में सिर्फ मेरे ही संवाद रहे। जैसे मैं बस खुद से ही बातें करती रही, खुद से प्‍यार करती रही जैसे अक्‍सर बच्‍चे करते है गुड्डे गुड़िय़ों के ... आगे पढ़ें...