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ब्लॉग्स (8)


>इस जहान से, जिसकी मैं कभी हो न सकीजहाँ का ख्‍वाब कभी मैं देख न सकीजिसके असूलों पर कभी खरी उतर न सकीजिसके दर्द मे अपने आँसू बहा न सकीजिसकी ना पर,मैं टूट कर धरती में समा न सकीहाँ, मैं खुश हूँ अपने जहान में जहाँ मेरा आसमां तो है। आगे पढ़ें...